हठयोगप्रदीपिका में सिंहासन (Simhasana): पारम्परिक शक्ति और चिकित्सीय लाभ
प्राचीन योगग्रंथ Hatha Yoga Pradipika के रचयिता Swami Swatmarama ने सिंहासन को
एक शक्तिशाली और रोगनाशक आसन बताया है। “सिंह” साहस, आत्मविश्वास और प्रखर अभिव्यक्ति का प्रतीक है। यह आसन केवल शारीरिक
मुद्रा नहीं, बल्कि आंतरिक निर्भीकता और ऊर्जा के
जागरण का साधन है।
हठयोगप्रदीपिका से संस्कृत संदर्भ
(अध्याय 1, श्लोक 52–53)
श्लोक 1.52
देवनागरी:
गुल्फौ च वृषणस्याधः सीवन्याः पार्श्वयोः
क्षिपेत् ।
दक्षिणे सव्यगुल्फं तु सव्ये दक्षिणगुल्फकम् ॥
भावार्थ:
दोनों टखनों को सीवनी (गुप्त स्थान) के पास
विपरीत दिशा में स्थापित करें।
श्लोक 1.53
देवनागरी:
हस्तौ जान्वोः संस्थाप्य स्वाङ्गुलीः प्रसार्य च
।
व्यात्तवक्त्रो निरीक्षेत नासाग्रं सिंहवद् दृढम्
॥
भावार्थ:
हाथों को घुटनों पर रखें, उँगलियाँ फैलाएँ, मुख खोलकर सिंह
के समान नासाग्र पर दृष्टि स्थिर करें।
पारम्परिक विधि
- वज्रासन या घुटनों के बल बैठें।
- टखनों को सीवनी के नीचे क्रॉस करें।
- दोनों हथेलियाँ घुटनों पर रखें।
- उँगलियाँ फैलाएँ।
- गहरी श्वास लें।
- मुँह खोलकर जीभ बाहर निकालें (ठोड़ी की ओर)।
- “ह” ध्वनि के साथ श्वास बाहर छोड़ें।
- दृष्टि नासाग्र या भ्रूमध्य पर रखें।
3–7 बार दोहराएँ।
पारम्परिक लाभ
- रोगनाशक प्रभाव
- कंठ क्षेत्र की शुद्धि
- वाणी की स्पष्टता
- भय का नाश
- आंतरिक शक्ति का जागरण
सिंहासन प्रतीकात्मक रूप से दबी हुई
भावनाओं के मुक्त प्रवाह और साहसिक अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।
आधुनिक वैज्ञानिक एवं चिकित्सीय
दृष्टिकोण
1. कंठ एवं स्वर
स्वास्थ्य
गले और स्वरयंत्र की मांसपेशियों को
सक्रिय करता है।
2. जबड़े और चेहरे
का तनाव कम करता है
तनाव से उत्पन्न जकड़न को घटाता है।
3. वेगस नाड़ी पर
प्रभाव
श्वास-प्रश्वास के माध्यम से
पैरासिम्पेथेटिक तंत्र को सक्रिय कर सकता है।
4. मानसिक तनाव
में कमी
भावनात्मक दमन को कम करने में सहायक।
5. रक्त संचार में
वृद्धि
मुख एवं ग्रीवा क्षेत्र में रक्त
प्रवाह बढ़ाता है।
सावधानियाँ
- घुटनों में गंभीर चोट होने पर सावधानी रखें।
- गले की सर्जरी के बाद अभ्यास न करें।
- अत्यधिक बल न लगाएँ।
यदि घुटनों में समस्या हो तो सुखासन
में बैठकर भी अभ्यास किया जा सकता है।
समन्वित चिंतन
सिंहासन हमें निर्भीक अभिव्यक्ति का
अभ्यास कराता है। यह केवल शारीरिक मुद्रा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति का जागरण है।
आधुनिक जीवन की तनावपूर्ण
परिस्थितियों में यह आसन मानसिक शुद्धि और भावनात्मक संतुलन प्रदान करता है।
समापन विचार
सिंह की गर्जना उसकी शक्ति का प्रतीक
है।
सिंहासन के माध्यम से साधक अपनी आंतरिक शक्ति और
स्पष्टता को जागृत करता है।



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